बहुत मुल्तफित
हो, बहुत मेहरबाँ हो,
तबाही में शायद कमी रह गई है।
'खुमार' अहले दुनिया को वह भी गराँ है,
जो लब पै जरा-सी हँसी रह गई है।
-'खुमार' अंसारी
1.मुल्तफित - आकृष्ठ, प्रवृत्त
2. गराँ - भारी, वज्नी
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बिक गये जब तेरे लब, तुझको क्या शिकवा, अगर,
जिन्दगी गर बादा - ओ - सागर में बहलाई गई।
ऐ गमे-दुनिया तुझे क्या इल्म तेरे वास्ते
किन-किन बहानों से तबिअत राह पर लाई गई।
-'साहिर' लुधियानवी
1.बादा-ओ-सागर - शराब और
शराब के पियाले
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बू-ए-वफा न
फूटे कहीं उनको यह खौफ है,
फूलों से ढक रहे हैं, हमारे मजार को।
-'असर' लखनवी
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बेगानावार ऐसे वो गुजरे करीब
से,
जैसे कि उनको मुझसे कोई वास्ता न था।
-अजहर कादिरी
1.बेगानावार
- बेगानों की तरह
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